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काव्या ने ईमानदारी की ताकत को जाना

यह कहानी हमें सिखाती है कि ईमानदारी सबसे बड़ी ताकत है; ईमानदारी हमें खुशी और भगवान का प्यार देती है।

Kavya ne Imaandari ki Taakat ko Jaana

कहानी


शांतिपुर नगर में काव्या नाम की एक होशियार छोटी लड़की रहती थी। उसे कहानियाँ पढ़ना और दोस्तों के साथ खेलना बहुत पसंद था। लेकिन हाल ही में उसने एक आदत डाल ली थी - कभी-कभी वह डर या मज़ाक के कारण झूठ बोल देती थी।


एक सुबह स्कूल में, टीचर ने पूछा,“काव्या, क्या तुमने अपना होमवर्क किया?”


काव्या होमवर्क करना भूल गई थी। डर के मारे उसने तुरंत कहा,“हाँ मैम, मैंने कर लिया। लेकिन नोटबुक घर पर भूल गयी हूँ।”


टीचर ने उस पर विश्वास किया और काव्या खुश हो गई। उसने खुद से कहा,“एक झूठ से क्या होता है?”

अगले दिन, जब वह अपना क्राफ्ट प्रोजेक्ट भी  नहीं लाई, तब भी उसने झूठ बोल दिया। धीरे-धीरे उसे झूठ बोलने की आदत हो गई।

लेकिन जल्द ही उसके दोस्त उस पर भरोसा करना छोड़ने लगे। वे धीरे से कहते,“काव्या हमेशा बहाने बनाती है।”


शाम को घर पर, उसकी बड़ी बहन प्रिया, संत कबीर का एक दोहा पढ़ रही थी। अगले दिन उसकी हिंदी की परीक्षा थी।


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“साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप,

जाके हृदय में साच है, ताके हृदय हिरआप।”


काव्या ने उत्सुक होकर पूछा,“दीदी, आप क्या पढ़ रही हो और इसका मतलब क्या है?”


प्रिया बोली, “इसका मतलब है कि ईमानदारी से बड़ा कोई तप नहीं और झूठ से बड़ा कोई पाप नहीं। जहाँ सच्चाई है, वहीं भगवान रहते हैं। यह संत कबीर का दोहा है। बड़े होकर तुम इसे और पढ़ोगी।”


काव्या ने अपने स्कूल में बोले झूठ के बारे में सोचा। “अगर भगवान ईमानदार लोगों के दिल में रहते हैं, तो वह मेरे दिल में नहीं रह सकते,” उसने धीरे से कहा।


अगले दिन, जब टीचर ने फिर से होमवर्क के बारे में पूछा, काव्या ने साहस जुटाया और कहा,“मैम, मैंने कल होमवर्क नहीं किया।मुझे माफ़ कीजिए। मैं आज पूरा कर लूँगी।”


टीचर थोड़ी हैरान हुईं, फिर धीरे से मुस्कुराई।“धन्यवाद काव्या, सच बोलने के लिए। गलतियों को माफ़ किया जा सकता है, लेकिन झूठ भरोसा तोड़ देता है। मुझे तुम्हारी ईमानदारी पर गर्व है।”


काव्या का दिल हल्का हो गया, जैसे कोई भारी बोझ उतर गया हो। उसके दोस्त भी मुस्कुराए और काव्या जान गई कि उसने मार्क्स या पुरस्कार से ज्यादा कीमती चीज पा ली है: भरोसा और भगवान का प्यार उसके दिल में।

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Doha


सांच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप ।
जाके हिरदय म साच है, ताके हिरदय हिर आप ॥

Saanch barabar tap nahi, jhooth barabar paap
Jake hriday mein saach hai, take hriday Hir aap


Source: Kabir Das Doha


अर्थ: सच्चाई (सत्य) से बड़ा कोई तप नहीं, और झूठ से बड़ा कोई पाप नहीं। जिसके हृदय में सच्चाई बसती है, उसके हृदय में स्वयं भगवान (हरि) निवास करते हैं।

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Story type: Motivational

Age: 7+years; Class: 3+

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