Free Shipping On Shopping Above ₹600 | Pan India Delivery Guaranteed In 5-6 Days
गुरु का ज्ञान
यह कहानी हमें सिखाती है कि एक सच्चे गुरु की मदद से ही हम सच या भगवान तक पहुँच सकते हैं।

Story
स्वामी विवेकानंद हमारे देश के एक महान दार्शनिक/फिलॉसफर थे। बचपन से ही उनकी गीता, वेद और उपनिषदों के ज्ञान में बहुत रुचि थी। उन्होंने हिन्दू दर्शन के ज्ञान का पूरे देश में प्रचार किया और उसे विदेशों तक भी पहुँचाया। उनके मन में हमेशा ही सच और भगवान को लेकर कई सवाल उठते रहते थे। उन्होंने भगवान और सच के बारे में बहुत सारी बातें सुनी थी पर वह बिना सबूत के किसी बात पर विश्वास नहीं करते थे।
एक दिन स्वामी विवेकानंद अपने गुरु श्री रामकृष्ण परमहंस के पास आए और उनसे कहा कि वह सच को महसूस करना चाहते हैं।
उनके गुरु बोले, “सच तक पहुँचना इतना आसान नहीं है, तुम्हें इस रास्ते पर धीरज रखते हुए आगे बढ़ना होगा।” उन्होंने विवेकानंद को भगवान का ध्यान करने की सलाह दी।
विवेकानंद गुरु की बात मान कर ध्यान का अभ्यास करने लगे। उन्होंने लगातार कई दिनों तक ध्यान का अभ्यास किया।
एक दिन विवेकानंद, भगवान में ध्यान लगा कर बैठे थे। वह अचानक चिल्ला उठे, “मेरा शरीर कहाँ है!”
वो अपने शरीर को महसूस नहीं कर पा रहे थे और खुद को उससे अलग देख रहे थे। वह खुद को आत्मा की तरह महसूस कर रहे थे।
उनके गुरु ने कहा, “मैंने तुम्हें वो दे दिया जो तुम्हें चाहिए था।”
इस घटना के बाद विवेकानंद यह समझ गए कि सच यही है कि हम इस शरीर से बढ़कर हैं, हम आत्मा हैं।
