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  • Writer's pictureNeeraj Sharma

हाथी कमाल, गाँव में धमाल

यह कहानी हमें सिखाती है, भगवान एक है पर हम उन्हें अलग-अलग रूपों में देखते हैं।

स्त्रोत: ऋग्वेद

Keywords: भगवान एक हैं, अनेकता में एकता


बहुत समय पहले की बात है अन्धकपुर नाम का एक गाँव था। जहाँ रहने वाले सभी लोग अंधे थे। वो चीज़ो को छू कर पहचानते और अपना सारा काम करते। एक बार एक कमाल की घटना हुई, गाँव में कहीं से एक हाथी आ गया।


गाँव के सभी लोग हाथी को छू कर यह जानने की कोशिश करने लगे कि आखिर ये चीज़ क्या है। एक आदमी ने हाथी का पेट छुआ और कहा, “यह तो बड़ी सी दीवार है।” तभी एक और आवाज़ आई, “नहीं-नहीं गोपाल, यह तो एक खंभा है।” फूलकुमारी ताई बोली जिन्होंने हाथी का पैर पकड़ा था।


“तुम गलत हो ताई यह तो एक पतली रस्सी है। यह बच्चों के कूदने के काम आएगी।” पूंछ पर लटके रामू काका बोले।


“क्या बात करते हो काका, यह तो एक मोटी पाइप है, हम इससे अपने खेतों में पानी डालेंगे।” मोहनलाल किसान ने कहा।


“आखिर तुम सबको हुआ क्या है जो एक बड़े से पंखे को कभी दिवार, कभी खंभा, तो कभी पाइप और रस्सी समझ रहे हो। चलो अच्छा है जो हमारे गाँव में यह बड़ा सा पंखा आ गया, इस भयानक गर्मी से कुछ तो राहत मिलेगी।” चंपा बोली जिसने हाथी का कान पकड़ा हुआ था।


तो बच्चों हमने देखा कि हाथी तो एक ही था पर किसी ने उसे दिवार समझा, किसी ने खम्भा, किसी ने पाइप तो वहीं किसी ने उसे रस्सी और पंखा समझ लिया।


ऋग्वेद के इस श्लोक में यही बात कही गई है।

एकं सत् विप्रा बहुधा वदन्ति


सच एक है पर विद्वान उसे अलग-अलग रूप में कहते हैं।

जैसे एक ही हाथी की सबने अलग-अलग चीज़ों के रूप में कल्पना की वैसे ही हम भी एक ही भगवान को अलग-अलग रूप में देखते हैं।


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Story type: Witty, Activity-based

Age:6+years;Class: 2+


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