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श्री राम ने सुग्रीव की मदद की
यह कहानी हमें सिखाती है कि सच्ची मित्रता का मतलब है हमेशा एक-दूसरे की मदद करना, भरोसा रखना और साथ खड़े रहना।

कहानी
फ्रेंडशिप डे का दिन था, और आनंदा गार्डन सोसाइटी के बच्चे बहुत खुश और उत्साहित थे। शाम को, सभी बच्चे अपने दोस्तों के लिए रंग-बिरंगी फ्रेंडशिप बैंड्स और छोटे-छोटे तोहफे लेकर सोसाइटी के पार्क में इकट्ठा हुए। उन्होंने एक-दूसरे की कलाई पर रिबन बाँधे और अपनी पक्की दोस्ती का उत्सव मनाया।
टिंकू, सभी बच्चों में सबसे बड़ा था, उसने ताली बजा कर सभी बच्चों का ध्यान आकर्षित किया। “मेरे पास आप सभी के लिए एक सरप्राइज़ है,” उसने मुस्कुराते हुए कहा।
“क्या सरप्राइज़ है, टिंकू भैया?” छोटी मीरा ने पूछा, जिसक े हाथों में चमचमाते रिबन थे। वह उत्सुकता और खुशी से उसकी ओर देख रही थी।
टिंकू ने रहस्यमयी मुस्कान के साथ कहा, “इस फ्रेंडशिप डे पर, मैं आपको एक ऐसी दोस्ती की कहानी सुनाने वाला हूँ, जो बहुत खास थी। ऐसी दोस्ती, जिसने पूरी दुनिया बदल दी।”
“ये किसकी कहानी है, भैया?” रवि ने उत्सुक्ता से पूछा।
“यह कहानी है भगवान राम और उनके प्रिय मित्र सुग्रीव की, जो वानरों के राजा थे,” टिंकू ने घास पर बैठते हुए कहा। बच्चे तुरंत उसके चारों ओर इकट्ठा हो गए।

टिंकू ने कहानी शुरू करी, “बहुत समय पहले, भगवान राम अपने भाई लक्ष्मण के साथ जंगलों में घूम रहे थे। वे,श्रीराम की पत्नी, देवी सीता को ढूँढ रहे थे, जिन्हें राक्षसराज रावण अपने साथ ले गया था।”
“सीता माता की खोज करते-करते, वे एक सुंदर जंगल में पहुँचे। वहाँ ऊँचे-ऊँचे पेड़ और सुगंधित फूल थे। वहीं उनकी मुलाकात हनुमान जी से हुई, जो राजा सुग्रीव के एक ज्ञानी और भरोसेमंद मंत्री थे। हनुमान जी ने भगवान राम के सामने झुककर कहा, ‘मैं ऐसे व्यक्ति को जानता हूँ जो आपकी मदद कर सकता है।’”
“कौन था वो व्यक्ति, भैया?” अन्या ने उत्सुकता से पूछा।
“वानरराज सुग्रीव,” टिंकू ने जवाब दिया।
“लेकिन उस समय सुग्रीव एक बड़ी कठिनाई का सामना कर रहे थे। उनके अपने भाई बाली ने उन्हें उनके राज्य से निकाल दिया था। बाली से बचने के लिए सुग्रीव एक पहाड़ी पर छिपकर रह रहे थे।”
टिंकू ने आगे कहा, “हनुमान जी प्रभु श्री राम और लक्ष्मण को सुग्रीव से मिलावाने ले गए।”
“जब सुग्री व ने रामजी की परेशानी के बारे में सुना, तो उन्होंने कहा, ‘श्री राम, मैं देवी सीता को ढूँढने में आपकी पूरी मदद करूँगा। लेकिन मुझे भी आपकी मदद चाहिए। मेरे भाई बाली ने मेरा राज्य छीन लिया है। कृपया मेरी मदद करें ताकि मैं अपना राज्य वापस पा सकूँ।’”
“क्या रामजी ने मदद के लिए हाँ कहा ?” रवि ने पूछा।
“हाँ,” टिंकू ने सिर हिलाते हुए कहा। “रामजी ने उनकी मदद करने का वादा किया। सुग्रीव और भगवान राम ने एक-दूसरे को गले लगाया और उनकी पक्की दोस्ती की शुरुआत हुई।”

“फिर क्या हुआ?” मीरा ने आगे झुकते हुए पूछा।
“श्रीराम ने अपना वादा निभाया,” टिंकू ने कहा। “उन्होंने सुग्रीव की सहायता की, जिससे वह बाली को हरा पाए।”
सुग्रीव ने भी अपना वादा निभाया।
उन्होंने हनुमानजी और अपनी पूरी वानर सेना को श्रीराम जी की मदद के लिए भेजा, ताकि वे माता सीता को खोज सकें।हनुमान जी माता सीता को ढूँढने में सफल रहे।
इसी तरह उनके बीच विश्वास की शुरुआत हुई और उनकी दो स्ती अटूट बन गई।”
“सुग्रीव और उनकी सेना ने फिर श्रीराम की मदद से राम सेतु बनाया, जो लंका तक पहुँचने का पुल था।साथ मिलकर उन्होंने एक बड़ा युद्ध लड़ा और रावण को हराया। श्रीराम और माता-सीता दुबारा मिल गए, और यह सब सभी के सहयोग और एक सच्ची दोस्ती की वजह से संभव हुआ।”

“लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती,” टिंकू ने कहा।
“रावण को हराने के बाद भी, सुग्रीव और रामजी अच्छे मित्र बने रहे। जब युद्ध खत्म हो गया, तब सुग्रीव का श्रीराम के प्रति सम्मान और भक्ति और बढ़ गई। श्रीराम भी अपने मित्र की बहादुरी और त्याग को कभी नहीं भूले।”
टिंकू ने रुककर बच्चों की तरफ़ देखा। “क्या तुम जानते हो कि रामजी और सुग्रीव की दोस्ती इतनी खास क्यों है?” उसने पूछा।
“क्योंकि उन्होंने एक-दूसरे की मदद की!” मीरा ने खुशी से कहा।
“बिलकुल सही,” टिंकू ने मुस्कुराते हुए कहा।
“सच्चे दोस्त अच्छे और बुरे समय में एक-दूसरे का साथ देते हैं। वे एक-दूसरे पर विश्वास रखते हैं, और हमेशा एक-दूसरे की मदद करते हैं। दोस्ती का मतलब क ेवल खेलना-कूदना और मस्ती करना नहीं है, बल्कि अपने दोस्त की मदद करना, प्रेम करना और सच्चा रहना भी है, भगवान राम और सुग्रीव की तरह।”
बच्चे बड़े ध्यान से टिंकू भैया की बात सुन रहे थे। फिर रवि उठा और उसने टिंकू भैया की कलाई पर एक रिबन बाँधा।
“आप हमारे राम जैसे हो, टिंकू भैया! आप हमारा मार्गदर्शन करते हो और हमें प्यारी-प्यारी कहानियाँ सुनाते हो।”
सब हँसे और ताली बजाने लगे। सबने फ्रेंडशिप डे, नई उमंग और सच्ची दोस्ती की सीख के साथ बनाया।
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श्लोक:
जिन्ह कें असि मति सहज न आई।
ते सठ कत हठि करत मिताई॥
कुपथ निवारि सुपंथ चलावा।
गुन प्रगटै अवगुनन्हि दुरावा॥2॥
Jinh keen asi mati sahaj na aai
Te sath kat hathhi karat mitai
Kupath nivaari supanth chalaava
Gun pragatai avagunhanhi duraava
स्रोत: रामचरितमानस
अर्थ
सच्चा मित्र वह है जो आपको गलत काम करने से रोकता है, सही रास्ता दिखाता है, आपकी अच्छी बातों की सराहना करता है और आपकी बुरी आदतों को सुधारने में मदद करता है।
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Story type: Motivational
Age: 7+years; Class: 3+






















