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भगवान विष्णु ने धरती माँ की रक्षा की
यह कहानी हमें सिखाती है कि भगवान हमारी रक्षा करने के लिए अलग-अलग रूप लेते हैं।

कहानी
बहुत समय पहले की बात है, हिरण्याक्ष नाम का एक शक्तिशाली असुर था। उसे एक विशेष वरदान मिला था कि कोई भी देवता या मनुष्य उसे नहीं हरा सकता। यह वरदान पाकर वह बहुत घमंडी और क्रूर हो गया था।
वह सारी सृष्टि पर शासन करना चाहता था। अपनी शक्ति दिखाने के लिए उसने पृथ्वी माता को उठाकर गहरे समुद्र में छुपा दिया। धरती पर अंधकार छा गया और सभी देवता बहुत चिंतित हो गए।
तब सभी देवता भगवान विष्णु के पास गए। भगवान विष्णु जो सृष्टि के रक्षक हैं, उन्होंने पृथ्वी को बचाने का वचन दिया। इसके लिए उन्होंने अपना तीसरा अवतार लिया — एक विशाल वराह के रूप में।
वराह भगवान ने जोर से गर्जना की, जिससे स्वर्ग भी काँप उठा, और फिर वह समुद्र की गहराइयों में उतर गए।
अंधकार से भरे सागर में भगवान वराह ने पृथ्वी माता को खोज निकाला। उन्होंने उन्हें बहुत ही सावधानी से धरती माँ को अपने मज़बूत दाँतों पर उठाया और ऊपर लाने लगे।
यह देखकर हिरण्याक्ष बहुत क्रोधित हो गया। उसने भगवान वराह को युद्ध के लिए ललकारा। भगवान वराह और असुर हिरण्याक्ष के बीच एक भयंकर युद्ध हुआ। दोनों की शक्ति से समुद्र हिल उठा। अंत में भगवान वराह ने हिरण्याक्ष को पराजित कर दिया और पृथ्वी माता को सुरक्षित उनके स्थान पर रख दिया।

सभी देवता और प्राणी खुशी से झूम उठे। उन्होंने भगवान विष्णु की वीरता और करुणा की प्रशंसा की। उसी दिन से वराह अवतार को साहस और सुरक्षा के प्रतीक के रूप में पूजा जाने लगा।
जब भी हमें डर लगे या हम असहाय महसूस करें, तो हमें याद रखना चाहिए कि कैसे भगवान विष्णु ने वराह रूप में दुनिया को बचाया था। श्रद्धा और साहस से हम किसी भी कठिनाई को पार कर सकते हैं।
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Shloka
ददर्श तत्राभिजितं धराधरं
प्रोन्नीयमानम् अवनिम् अग्र दंष्ट्रया ।
मुष्णन्तमक्ष्णा स्वरुचोऽरुणश्रिया
जहास चाहो वनगोचरो मृग: ॥
स्त्रोत : श्रीमद्भागवतम्
अर्थ:
एक महान, चमकदार और पर्वत के समान विशाल वराह प्रकट हुआ, जिसने अपने मजबूत दाँतो से धरती को धीरे-धीरे ऊपर उठाया, उसकी आँखें उगते सूरज की तरह चमक रही थीं। यह दृश्य देखकर सभी लोग आश्चर्य और श्रद्धा से भर गए।
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Story type: Spiritual
Age: 7+years; Class: 3+






















