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विभीषण: श्रीराम के सच्चे मित्र
यह कहानी सिखाती है कि सच्चे दोस्त सच्चाई, न्याय और शांति के लिए हमेशा एक साथ खड़े रहते हैं।

Story बहुत समय पहले, स्वर्ण नगरी लंका में एक ज्ञानी और धर्मप्रिय व्यक्ति रहते थे — उनका नाम था विभीषण। वह लंका के ताकतवर और घमंडी राजा रावण के छोटे भाई थे। लेकिन जहाँ रावण अहंकारी और अधर्मी था, वहीं विभीषण शांत, बुद्धिमान और सत्य का पालन करने वाले थे। वह सच्चाई, करुणा और धर्म के मार्ग में विश्वास करते थे।
एक दिन, रावण ने बहुत बड़ा अधर्म किया। वह श्रीराम की पत्नी देवी सीता को बलपूर्वक लंका ले आया। विभीषण, रावण का यह गलत कर्म देखकर बहुत दुखी हुए। उन्होंने बार-बार रावण से निवेदन किया, “भैया, सीता माता को श्रीराम को लौटा दो। आपके के इस कार्य के कारण युद्ध हो सकता है और युद्ध से केवल विनाश ही होगा। शांति का मार्ग चुनो।”
लेकिन रावण ने उसकी एक न सुनी।
विभीषण ने महसूस किया कि अब रावण का रास्ता अधर्म और विनाश की ओर जा रहा है। वह बहुत दुखी हुए लेकिन उसने एक साहसीक निर्णय लिया। वह अपने महल, परिवार और सारी सुख-सुविधाओं को छोड़कर श्रीराम की शरण में चला गए।
जब वह श्रीराम के शिविर पहुँचा, तो वानर सेना के सैनिकों को उनपर शक हुआ। “यह तो रावण का भाई है,” उन्होंने कहा, “क्या हम इस पर भरोसा कर सकते हैं?”
लेकिन श्रीराम ने विभीषण को शांत और करुणा भरी दृष्टि से देखा। उन्होंने कहा, “जो भी सच्चे मन और प्रेम से मेरे पास आता है, वह मेरा है।” और उन्होंने विभीषण को गले लगाकर सच्चा मित्र बना लिया।

उस दिन से विभीषण श्रीराम के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित हो गए। उन्होंने श्रीराम को लंका और रावण की सारी कमजोरियों के बारे में बताया, जिससे श्रीराम की सेना को युद्ध में बहुत मदद मिली।
युद्ध के दौरान विभीषण श्रीराम के साथ एक दीपक की तरह अडिग खड़े रहे। जब अंत में रावण हार गया, तब श्रीराम ने विभीषण से कहा, “तुमने कठिन समय में सत्य का साथ दिया है। अब तुम लंका के राजा बनोगे।”
विभीषण ने श्रीराम की आज्ञा मानी और लंका में न्याय और शांति से राज्य किया। उन्होंने सच्चाई और धर्म का साथ देकर एक महान आदर्श स्थापित किया।

इस प्रकार, श्रीराम और विभीषण की मित्रता एक अमर कथा बन गई। यह हमें सिखाती है कि सच्चा मित्र वही होता है जो सच्चाई और धर्म के साथ खड़ा हो। जब हम सही निर्णय लेते हैं, तो न केवल हम सच्चे मार्ग पर चलते हैं, बल्कि सच्चे मित्र भी पा जाते हैं।
चाहे परिस्थिति कैसी भी हो, हमेशा सही का साथ दो। सच्चे मित्र वे होते हैं जो सत्य, धर्म और न्याय के लिए एक साथ खड़े रहते हैं।
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Shloka
विभीषणो धर्मज्ञो रामस्य प्रियकांक्षिणः।
सर्ववेदान्तसर्वज्ञो लंकेशं हत्वा राजयिष्यति॥
Vibhishano dharmajno Ramasya priyakankshinah
Sarvavedantasarvajno Lankesham hatva rajayishyati
Source: वाल्मीकि रामायण, सुन्दरकाण्ड, सर्ग 36, श्लोक 40
Meaning
विभीषण, जो धर्म को समझते हैं और हमेशा श्रीराम का भला चाहते हैं, रावण के पराजित होने के बाद लंका के राजा बनेंगे। वे वेदों के ज्ञाता हैं और धर्म ज्ञान रखते हैं।
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Story type: Spiritual
Age: 7+years; Class: 3+






















