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विवेकानंद ने माँ काली से क्या माँगा?

यह कहानी हमें सिखाती है कि ज्ञान और भक्ति को संसार की हर चीज़ से ऊपर है।

Keywords: ज्ञान, सच, प्रार्थना

विवेकानंद ने माँ काली से क्या माँगा

Story


हम स्वामी विवेकानंद को उनके ज्ञान और उनकी निडरता के लिए जानते हैं। जिस उत्साह और कठिन परिश्रम से उन्होंने हिन्दू दर्शन का ज्ञान देश-विदेश तक पहुँचाया उसकी तारीफ़ भारत के साथ-साथ दुनिया भर के लोग करते हैं।


पर हम में से शायद बहुत लोग यह नहीं जानते होंगे कि कई बार वह जीवन में निराश भी हुए और उन्हें कई तरह की कठिनाइयों से भी गुज़रना पड़ा। 


स्वामी विवेकानंद के जीवन की एक ऐसी ही घटना के बारे में हम आपको बताने वाले हैं। 


स्वामी विवेकानंद के जन्म का नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था। उनके माता-पिता उन्हें प्यार से नरेंद्र बुलाते थे। जब नरेंद्र की उम्र 21 साल थी तब अचानक उनके घर में पैसों की कमी के कारण घर की हालत बहुत खराब हो गई।


दोस्तों और रिश्तेदारों ने भी इस बुरे समय में नरेंद्र के परिवार की मदद नहीं की। घर की सारी ज़िम्मेदारी नरेंद्र के ऊपर आ गई। नरेंद्र उस समय एक छात्र थे, वह नौकरी की तलाश में जगह-जगह गए पर उन्हें नौकरी नहीं मिली।


उन्होंने ये सारी बात अपने गुरु रामकृष्ण परमहंस को बताई। उनके गुरु ने उन्हें माँ काली से धन के लिए प्रार्थना करने के लिए कहा ताकि उनके घर की हालत सुधर सके।


हालांकि स्वामी विवेकानंद माँ काली में विश्वास नहीं करते थे पर उन्होंने अपने गुरु की बात मान ली। 


16 सितंबर, 1884 को विवेकानंद, दक्षिणेश्वर के काली मंदिर में प्रार्थना करने गए। उन्होंने काली माँ की मूर्ती को प्रणाम किया और माँ से ज्ञान और भक्ति पाने के लिए प्रार्थना की


वह यह बिलकुल भूल गए कि उन्हें माँ से धन पाने के लिए प्रार्थना करनी थी। उनके गुरु मंदिर के बाहर ही उनका इंतज़ार कर रहे थे।


जब विवेकानंद प्रार्थना कर के मंदिर से बाहर आए तब उनके गुरु ने उनसे पूछा, “क्या तुमने अपने घर की हालत सुधारने के लिए माँ से प्रार्थना की?” तब विवेकानंद ने गुरु को बताया कि वह धन के लिए प्रार्थना करना भूल गए।


गुरु ने विवेकानंद को दूसरी बार माँ से प्रार्थना करने के लिए भेजा। विवेकानंद एक बार फिर मंदिर गए और हाथ जोड़कर माँ से सच्चा ज्ञान पाने के लिए प्रार्थना की।


एक बार फिर वह प्रार्थना करने की असली वजह भूल गए। इसपर उनके गुरु ने उन्हें तीसरी बार मंदिर में माँ से प्रार्थना करने के लिए भेजा।


विवेकानंद तीसरी बार मंदिर में माँ से प्रार्थना करने गए। उन्होंने माँ से धन-दौलत माँगने की कोशिश की पर ऐसा करते हुए उन्हें बहुत छोटा महसूस हुआ।


काली माँ जो अनंत और कभी न खत्म होने वाली शक्ति हैं जिनसे यह पूरा संसार है वह उनसे धन-दौलत और सांसारिक सुख-सुविधाओं जैसी छोटी और खत्म हो जाने वाली चीज़ें माँग रहे हैं। यह सोचकर वह माँ से बिना कुछ माँगे बहार आ गए।


गुरु यह देखकर बहुत खुश हुए कि उनके शिष्य ने ज्ञान और भक्ति को संसार की हर चीज़ से ऊपर रखा। इस घटना के बाद स्वामी विवेकानंद काली माँ के सच्चे भक्त हो गए।

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