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सुपरवुमन सिस्टर निवेदिता

यह कहानी हमें सिखाती है कि हमारे मन में दूसरों के लिए प्रेम और करुणा होनी चाहिए और हमें ज़रूरतमंद लोगों की मदद करनी चाहिए ताकि उनका जीवन बेहतर हो सके।

Keywords: सेवा, हिंदू दर्शन, करुणा

सुपरवुमन सिस्टर निवेदिता

Story


सिस्टर निवेदिता का जन्म, 28 अक्टूबर 1867 को आयरलैंड में हुआ था। उनका बचपन का नाम मार्ग्रेट था। मार्ग्रेट के पिता का नाम सैमुएल रिचमॉन्ड नोबेल था और माता का नाम मेरी इसाबेल था।


मार्ग्रेट के पिता चर्च में काम करते थे, और गरीब और दुखी लोगों की सेवा करते थे। अपने पिता को गरीबों की सेवा करते देखकर, मार्ग्रेट के मन में भी गरीब और दुखी लोगों के लिए सेवा का भाव जागा। 


मार्ग्रेट बड़ी होकर लंदन में एक टीचर बनी और वो इसाई धर्म के बारे में लोगों को बताया करती थी पर उनके मन में कई सवाल थे जिनके जवाब वो ढूँढ रही थी। वो गरीब और दुखी लोगों की सेवा भी करती थी।


एक बार वो भारत के एक महान दार्शनिक, स्वामी विवेकानंद से मिली, जब वह अमेरिका से लंदन आए थे। मार्ग्रेट ने हिन्दू दर्शन* पर स्वामीजी के विचार सुने जो उन्हें बहुत पसंद आए। मार्ग्रेट को लगा कि स्वामीजी के पास उनके सभी सवालों का जवाब है।


कुछ सालों बाद मार्ग्रेट भारत आईं। स्वामी विवेकानंद ने उन्हें अपनी स्टूडेंट बनाया और उन्हें निवेदिता नाम दिया। मार्ग्रेट को अब सभी सिस्टर निवेदिता कहकर बुलाने लगे। निवेदिता ने भारत के गरीब और दुखी लोगों की बहुत सेवा की।


निवेदिता ने लड़कियों की पढ़ाई पर बहुत ध्यान दिया। उन्होंने कोलकाता में लड़कियों के लिए एक स्कूल खोला। स्वामी विवेकानंद और सिस्टर निवेदिता का मानना था कि अच्छी शिक्षा से ही भारत के लोगों के जीवन में सुधार आ सकता है।


जब कोलकाता में प्लेग महामारी फैली तब सिस्टर निवेदिता ने अपनी जान की परवाह ना करते हुए, मरीज़ों की दिन-रात सेवा की। वह खुद भी बीमार हो गई पर उन्होंने लोगों की सेवा करना नहीं छोड़ा। 


सिस्टर निवेदिता ने पूरे देश के लोगों तक हिन्दू दर्शन का ज्ञान पहुँचाने और उन्हें शिक्षा का महत्व समझाने में स्वामी विवेकानंद की सहायता की। उन्होंने भारत के बच्चों को एक बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए बहुत काम किया।


स्वामी विवेकानंद की मृत्यु के बाद उन्होंने उनके जीवन पर और उनकी शिक्षाओं पर कई लेख और किताबें लिखीं। स्वामी विवेकानंद की मानव सेवा की शिक्षा को उन्होंने आगे बढ़ाया। सिस्टर निवेदिता ने अपना पूरा जीवन भारत के लोगों की सेवा और बेहतरी के लिए समर्पित कर दिया। 


बच्चों, सिस्टर निवेदिता की कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमारे मन में दूसरों के लिए प्रेम और करुणा होनी चाहिए और हमें ज़रूरतमंद लोगों की मदद करनी चाहिए ताकि उनका जीवन बेहतर हो सके।


दर्शन* - विचारों का संकलन जो हमें सच/भगवान तक पहुँचने में मदद करते हैं। 


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Story type: Motivational


Age: 7+years; Class: 3+

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