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हम सब एक हैं

यह कहानी हमें सिखाती है कि हर व्यक्ति में भगवान होता है।

Keywords: मित्रता, सहानुभूति, सपना

हम सब एक हैं

Story


वंश कक्षा पाँचवी में पढ़ने वाला एक मासूम और नेक लड़का था। उसे रोज़ स्कूल जाना, पढ़ाई करना और दोस्तों के साथ खेलना बहुत पसंद था। स्कूल में सबकुछ अच्छा चल रह था, फिर एक दिन स्कूल में एक नया लड़का आया, सनी। वह प्रिंसिपल का बेटा था। वह स्कूल के बच्चों पर बहुत धौंस जमाता था।


वह वंश को बहुत परेशान किया करता था। सनी कभी वंश का लंच खा जाता तो कभी उसकी बोतल का पानी गिरा देता। वह अपना होमवर्क भी वंश से ही करवाता, यहाँ तक की अपना बैग भी उसी से उठवाता था।


सनी ने वंश को ये सारी बातें अपने मम्मी-पापा को बताने से मना किया था। उसने कहा था कि अगर वो इस बारे में कुछ भी अपने मम्मी-पापा को बताएगा तो वो उसे स्कूल से निकलवा देगा।


वंश, सनी की हरकतों से बहुत परेशान हो चुका था। वह मम्मी-पापा से छुप कर अपने कमरे में रोया करता था। वंश की यह हालत देख, उसका दोस्त नचिकेता बहुत दुखी हुआ। नचिकेता ने वंश की परेशानी दूर करने की ठान ली।


नचिकेता एक रात सनी के घर गया। उसने सनी को उठाया और अपने साथ चलने के लिए कहा। सनी नहीं माना तो, नचिकेता ने जादू से उसे हिप्नोटाइज़ कर दिया। और वो दोनों एक जादुई आईने के अंदर घुसे और सनी और वंश के स्कूल पहुँच गए।


सनी को लगा कि वो वंश है जिसे एक लड़का परेशान कर रहा था। जो कुछ भी सनी ने वंश के साथ किया था वो सब अब उसके साथ भी हो रहा था। सनी को भी उतना ही बुरा लग रहा था जितना बुरा वंश को लगता था।


अचानक सनी की आँख खुली और उसे समझ आया कि वो एक सपना देख रहा था। नचिकेता वहीं उसके सामने खड़ा था।


“मैं वंश बन गया था और मुझे समझ आया कि मेरे बर्ताव से उसे कितना बुरा लगता था,” सनी हैरान और दुखी होकर बोला।


“हाँ, क्योंकि तुम दोनों एक ही हो। तुम दोनों में एक ही शक्ति है जिससे तुम अच्छा-बुरा महसूस कर पाते हो। इसलिए जब तुम वंश को दुखी या परेशान करते हो तब असल में तुम खुद को परेशान करते हो,” नचिकेता ने सनी को समझाते हुए कहा।


“मैं समझ गया, अब मैं वंश और दूसरे बच्चों को परेशान करना छोड़ दूँगा। मुझे सही बात समझाने के लिए तुम्हारा धन्यवाद,” सनी ने नचिकेता से कहा।


हम सबके अंदर एक ही भगवान हैं, इसका मतलब हम सब एक हैं।

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स्रोत: भगवद् गीता


भगवद् गीता में कृष्ण कहते हैं


कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन

हमारा अधिकार सिर्फ अपने कर्म पर है उसके फल पर नहीं।

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Story type: Adventure, Motivational

Age: 7+years; Class: 3+

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