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ध्रुव की कहानी

यह कहानी हमें सिखाती है कि हमें निडर रहना चाहिए।

Keywords: निडरता, भक्ति, संकल्प-शक्ति, भागवत पुराण

ध्रुव की कहानी

Story


ध्रुव शब्द का अर्थ है अटल, वह जो अपने इरादे का पक्का हो और अपनी बात से कभी ना हटे।


आठ साल की मीरा बहुत सारी चीज़ो से डरती थी। वह अँधेरे कमरे में जाने से डरती थी, अकेले सोने से डरती थी। उसे कीड़ों से भी बहुत डर लगता था और परीक्षा के नाम से तो वो थर-थर काँपती थी।


एक बार उसके मम्मी-पापा को किसी ज़रूरी काम से बाहर जाना पड़ा। मीरा घर पर अकेली थी। उसे बहुत डर लग रहा था। उसने सोचा, “काश नचिकेता यहाँ होता।“ बस फिर क्या था, नचिकेता जादू से मीरा के सामने आ गया।


“लगता है तुम बहुत डरी हुई हो, चलो तुम्हारा डर दूर करने के लिए एक छोटे और साहसी बच्चे की कहानी सुनाता हूँ जिसका नाम था ध्रुव,” नचिकेता बोला।


क्या आप भी ध्रुव के बारे में जानना चाहते हैं? तो चलिए कहानी सुनते हैं।


बहुत समय पहले एक राजा थे उत्तानपाद जिनकी दो रानियाँ थीं सुनीति और सुरुचि।


दोनों रानियों के स्वभाव में बहुत अंतर था। सुनीति शांत और सरल स्वभाव की थी और सुरुचि बहुत चालाक और घमंडी थी। रानी सुनीति के बेटे का नाम था ध्रुव और रानी सुरुचि के बेटे का नाम था उत्तम।


एक दिन ध्रुव अपने पिता उत्तानपाद की गोद में खेल रहा था। तभी रानी सुरुचि ने आकर ध्रुव को राजा की गोद से नीचे उतार दिया और कहा, “तुम राजा की गोद में नहीं बैठ सकते। राजा की गोद पर सिर्फ मेरे बेटे का अधिकार है।” सुनीति की बात से ध्रुव बहुत दुखी हुआ। उसने जाकर सारी बात माँ को बताई।


माँ ने ध्रुव से कहा, “भगवान की भक्ति में बहुत शक्ति है। अगर तुम सच्चे मन से भगवान की भक्ति करोगे तो तुम्हें पिता की गोद तो क्या भगवान की गोद में जगह मिल सकती है।”


पाँच साल का निडर ध्रुव भगवान की प्रार्थना करने जंगल के लिए निकल गया। ऋषि नारद ने ध्रुव को जंगल की ओर जाते देखा तो उसे समझाकर महल वापस भेजने की कोशिश की। पर ध्रुव अपनी बात पर टिका रहा। ध्रुव के पक्के इरादे से खुश होकर नारदजी ने उसे ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करने के लिए कहा।


ध्रुव ना तो जंगली जानवरों से डरा, ना ही कड़कती धूप, तेज़ बारिश, और बर्फीली ठण्ड से। वो बिना रुके कई महीनों तक भगवान से प्रार्थना करता रहा। ध्रुव की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान उसके सामने प्रकट हुए और मनचाहा वरदान माँगने को कहा। ध्रुव बोला, “आपके दर्शन पाकर मैं बहुत प्रसन्न हूँ। मुझे और कुछ नहीं चाहिए।”


भगवान ने ध्रुव को आशीर्वाद दिया कि उसका नाम हमेशा अमर रहेगा।


प्यारे बच्चों आज भी हम ध्रुव को आसमान में सबसे ज़्यादा चमकने वाले ध्रुव तारे के नाम से जानते हैं।

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स्रोत: भगवद् गीता


भगवद् गीता के इस श्लोक में कृष्ण ने कहा है

विगते इच्छा भय क्रोधो यः सदा मुक्त एव सः


जिसे किसी चीज़ की इच्छा ना हो, किसी का भय ना हो और जो कभी क्रोध ना करे, वो हमेशा मुक्त रहता है।

जैसे ध्रुव बिना डरे अपने रास्ते पर चला और भगवान से मिला, अगर हम भी निडर होकर साहस से सही काम करेंगे तो हम हमेशा सफल होंगे।

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Story type: Mythological, Activity-Based

Age: 6+years; Class: 2+

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