Free Shipping On Shopping Above ₹600 | Pan India Delivery Guaranteed In 5-6 Days
सच का खेल
सच बोलने वाले की हमेशा जीत होती है।

कहानी
गर्मी की छुट्टियाँ थीं। मेघा, स ीमा और उनके कुछ दोस्त एक समर कैम्प में गए थे। वहाँ खेल-खेल में सीखने के लिए कई मज़ेदार गतिविधियाँ रखी गई थीं। लेकिन सबसे अलग और दिलचस्प खेल था—“सच का खेल”।
खेल का नियम बड़ा आसान था—हर बच्चे से कुछ सवाल पूछे जाएँगे, और जो सच बोलेगा वह अगले लेवल तक जाएगा। अगर कोई झूठ बोलेगा, तो रास्ता बंद हो जाएगा। और यह रोचक खेल शुरू हुआ।
पहला लेवल – जादुई दरवाज़ा बच्चों को एक चमचमाते सुनहरे दरवाज़े के सामने खड़ा किया गया। दरवाज़े पर लिखा था—“सच ही चाबी है।”
कैम्प गाइड ने मुस्कुराते हुए कहा, “मेघा, तुम्हारी बारी है। बताओ, क्या तुमने कभी गलती करके झूठ बोला है?”
मेघा थोड़ी सोचकर बोली, “हाँ, एक बार मैंने गलती से पापा की किताब पर पानी गिरा दिया था। मैं डर गई थी इसलिए पापा से झूठ कह दिया कि पानी मेरे छोटे भाई ने गिराया है।”
जैसे ही मेघा ने सच कहा, दरवाज़ा चमकने लगा और धीरे-धीरे खुल गया, वहाँ एक पर् ची राखी थी जिसपर अगले लेवल थक पहुँचने का रास्ता था। मेघा अगले लेवल में पहुँच गई।

अब सीमा की बारी थी। उससे पूछा गया, “क्या तुमने कभी होमवर्क न करने पर झूठ बोला है?”
सीमा ने तुरंत कहा, “नहीं, कभी नहीं!”
लेकिन असल में उसने कई बार ऐसा किया था। दरवाज़ा नहीं खुला, न ही कोई रोशनी आई, न कोई सुराग। सीमा मायूस हो गई। उसे समझ आया कि आगे जाने के लिए उसे सच बोलना चाहिए था।
दूसरा लेवल – बोलता हुआ पेड़
मेघा के सामने अब एक बड़ा-सा पेड़ था। उस पेड़ की आँखें थीं और वह बोल भी सकता था।
पेड़ ने कहा, “अगर तुम सच बोलोगी, तो मैं तुम्हें आगे का रास्ता दिखाऊँगा।”

उसने सवाल पूछा, “क्या तुमने कभी किसी खेल में बेईमानी की है? मेघा ने हाँ में सिर हिलाया और बोली, “हाँ, मैं एक बार ऐसा किया था। लेकिन बाद में मैंने सच-सच कहा और अपनी गलती मान ली।”
पेड़ खुश हुआ और अपने पत्तों से झर-झर कर एक चमकदार तीर गिराया। तीर ज़मीन पर गिरते ही अगले दरवाज़े की ओर इशारा करने लगा।
तीसरा लेवल – चमकती गुफ़ा
आगे एक गहरी गुफ़ा थी, जिसके अंदर बहुत अँधेरा था। गुफ़ा की दीवार से आवाज़ आई, “यहाँ से वही गुज़रेगा जो अपने डर के बारे में सच बताएगा।”
मेघा ने हिम्मत करके कहा, “मुझे अँधेरे से डर लगता है!”
जैसे ही उसने सच बोला, गुफा में छोटी- छोटी रोशनी जगमगाने लगी। रास्ता साफ दिखने लगा और मेघा आसानी से गुफा पार कर गई।

आख़िर में मेघा एक खुले मैदान में पहुँची। वहाँ पर कैम्प गाइड खड़े थे। उन्होंने मुस्कुराकर कहा, “मेघा, तुमने यह खेल जीत लिया।
तुमने दिखा दिया कि जीतने के लिए तेज़ दौड़ना या चालाकी करना ज़रूरी नहीं है। असली ताक़त सच बोलने में है।”
सीमा और बाकी बच्चों ने भी समझा कि सच बोलना कठिन लगता है, लेकिन वही हर दरवाज़ा खोल देता है और स ही रास्ता दिखता है।
For more such stories buy myNachiketa Books
श्लोक
सत्यमेव परं ब्रह्म सत्यमेव परं तपः ।
सत्यमेव परो यज्ञस्सत्यमेव परं श्रुतम् ॥
स्त्रोत: शिवमहापुराण
अर्थ
सत्य ही परब्रह्म है, सत्य ही परम तप है, सत्य ही परम यज्ञ है और सत्य ही परम शास्त्र है।
Download the Activity Related to Story
Story Video
Watch this Video to know more about the topic
Story type: Motivational
Age: 7+years; Class: 3+






















