top of page

Free Shipping On Shopping Above ₹600 | Pan India Delivery Guaranteed In 5-6 Days

ऊँट और जादुई रस्सी की कहानी

ज्ञान हमें सच और झूठ में अंतर करना सीखता है।

oont aur jadui rassi

कहानी बहुत समय पहले की बात है। एक व्यापारी था, जो अपने तीन ऊँटों के साथ अलग-अलग शहरों में सामान बेचने जाया करता था। दिन भर का काम करने के बाद एक रात वह बहुत थक गया। उसने सोचा,“आज किसी सराय (धर्मशाला) में रुककर आराम कर लूँ।”


वह एक सराय पहुँचा और ऊँटों को बाहर बाँधने लगा। दो ऊँट तो वह रस्सी से बाँध पाया, लेकिन तीसरे ऊँट को बाँधने के लिए रस्सी कम पड़ गई। व्यापारी परेशान हो गया। उसने तीसरे ऊँट को बार-बार बैठाने की कोशिश की, लेकिन ऊँट टस से मस नहीं हुआ।


इसी बीच वहाँ से एक साधु गुज़र रहे थे। उन्होंने व्यापारी को उदास देखा और पूछा, “भाई, क्यों परेशान हो? क्या दिक्कत है?”


व्यापारी बोला, “बाबा, मेरे पास तीन ऊँट हैं। दो को तो मैंने बाँध दिया है, पर तीसरे के लिए रस्सी नहीं है। बिना बाँधे मैं इसे ऐसे ही कैसे छोड़ दूँ?”


साधु हँस पड़े और बोले, “अरे! इसमें क्या परेशानी है? इसे भी वैसे ही बाँध दो जैसे बाकी ऊँटों को बाँधा है।”


व्यापारी हैरान होकर बोला, “लेकिन बाबा, मेरे पास तो रस्सी ही नहीं है!”


साधु मुस्कराए, “रस्सी की ज़रूरत ही कहाँ है? तुम बस ऐसे दिखाओ जैसे इसे बाँध रहे हो। ऊँट खुद मान लेगा कि वह बँधा हुआ है।”


व्यापारी को बात अजीब लगी, लेकिन उसने वैसा ही किया। उसने बिना रस्सी के ऊँट को खूँटे से बाँधने का अभिनय किया। 


व्यापारी यह देखकर हैरान रह गया कि ऊँट तुरंत बैठ गया और शांति से बैठा रहा। व्यापारी अंदर गया और चैन की नींद सोया।

ree

सुबह जब वह ऊँटों को खोलने आया, तो दो ऊँट तुरंत उठ गए। पर तीसरा ऊँट अपनी जगह से हिला तक नहीं। व्यापारी ने उसे उठाने की बहुत कोशिश की, लेकिन ऊँट अपनी जगह पर ही बैठा रहा।


उसी समय वही साधु फिर वहाँ से गुज़रे। उन्होंने हँसकर कहा, “कल रात तुमने इसे बाँधा था, है न? अब इसे उठाना है तो पहले खोलो भी तो सही!”


व्यापारी बोला, “बाबा, मैंने तो इसे सच में कभी बाँधा ही नहीं था, बस दिखावा किया था।”


साधु मुस्कराए और बोले,“तो जैसे तुमने बाँधने का दिखावा किया था, वैसे ही खोलने का भी करो।”


व्यापारी ने हवा में रस्सी खोलने का अभिनय। अरे वाह! ऊँट तुरंत उठ खड़ा हुआ और बाकी ऊँटों के साथ चल पड़ा।


जैसे ऊँट को समझ न होने के कारण एक काल्पनिक रस्सी भी सच लग रही थी, वैसे ही हमें भी कभी-कभी ज्ञान न होने के कारण, सच और झूठ का अंतर समझ नहीं आता। इसलिए हमें सही ज्ञान पाकर सच तक पहुँचने की कोशिश करनी चाहिए।

For more such stories buy myNachiketa Books

Age: Everyone!

Language: English

₹690

23% OFF

hindi book set.png

Age: Everyone!

Language: Hindi

₹576

20% OFF

श्लोक 


तद्विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया।

उपदेक्ष्यन्ति ते ज्ञानं ज्ञानिन: तत्त्वदर्शिन:।। 


स्त्रोत : भगवद् गीता

अर्थ 
अगर तुम सच जानना चाहते हो तो गुरु के पास जाओ। उनसे प्रेम और आदर से सवाल पूछो। गुरु ही तुम्हें सही ज्ञान देंगे, क्योंकि वे खुद सच जानते हैं।

Download the Activity Related to Story

Story Video

Watch this Video to know more about the topic

Story type: Motivational

Age: 7+years; Class: 3+

More Such Stories

2.webp
Let's Share Happiness / The Ultimate Prayer
2.webp
How did Lord Hanuman cross the sea?
2.webp
God is our true friend
bottom of page