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भूमि ने सीखा सच का महत्व
जो सच की राह पर चलते हैं उन्हें सच्ची खुशी और सफ़लता मिलती है ।

कहानी
8 साल की भूमि वैसे तो एक बहुत ही समझदार बच्ची थी, पर कुछ दिनों से उसके माता-पिता को उसके बर्ताव में कुछ बदलाव दिख रहे थे। वह छोटी-छोटी बातों पर झूठ बोलती थी और अपने माता-पिता और शिक्षकों का अनादर करने लगी।
भूमि का भाई कुश भी उसी के तरह बर्ताव करने लगा। भूमि के माता-पिता यह सब देखकर बहुत परेशान थे। दरअसल, भूमि ने हाल ही में कुछ नए दोस्त बनाए थे जो बहुत झूठ बोलते थे और सबके साथ गलत व्यवहार किया करते थे।
भूमि का बर्ताव दिन पर दिन ना पसंदीदा होता जा रहा था। हद तो तब हो गई जब एक दिन, उसकी टीचर ने उसे परीक्षा में नकल करते हुए पकड़ा।

टीचर उसे प्रिंसिपल मैडम के पास ले गईं, प्रिंसिपल मैडम ने तुरंत भूमि के माता-पिता को स्कूल बुलाया।
प्रिंसिपल मैडम ने पहले तो उसे डाँटा, फिर प्यार से सही-गलत का अंतर समझाया।
भूमि को अपने किए के कारण, सबके सामने शर्मिंदा होना पड़ा। वह अपने किए पर बहुत पछता रही थी। उसे एहसास हुआ कि झूठ बोलने और गलत रास्ते पर चलने के कितने नुक्सान हो सकते हैं।
भूमि की माँ ने उसे समझाया, “हम सबसे कभी ना कभी गलतियाँ हो जाती है पर समझदारी इसी में है कि हम समय रहते उस गलती को सुधार लें और हमेशा सच का साथ दें।”
चलो, हम साथ मिलकर भगवान से प्रार्थना करते हैं कि वो हमें ज्ञान दे ताकि हम हमेशा सच्चाई और अच्छाई की राह पर चलें।”

भूमि ने माँ को धन्यवाद किया और उन्हें वचन दिया कि अब वो कभी झूठ नहीं बोलेगी और हमेशा सच की राह पर चलेगी।
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श्लोक
असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय ।
मृत्योर्मा अमृतं गमय, ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
स्त्रोत: बृहदारण्यक
अर्थ
हे भगवान ! मुझे असत्य से सत्य की ओर ले चलो।
मुझे अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले चलो।
मुझे मृत्यु से अमरता की ओर ले चलो।
हे परमात्मा, हमें शांति प्रदान करो।
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Story type: Motivational
Age: 7+years; Class: 3+






















